11 January, 2011

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला

सभी जिम्मेदार क्या राजा, क्या वजीर



2जी स्पेक्ट्रम घोटाला खुलने के बाद दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर ही गाज गिरी। राजा ने उस वक्त कहा था- इस्तीफे का मतलब यह नहीं है कि मैं दोषी हूं। यह बात दीगर है कि प्रधानमंत्री चाहते थे कि राजा इस्तीफा दें। इस्तीफे के बाद सवालों की झड़ी लग गई। क्या राजा का इस्तीफा काफी था? क्या मंत्रिमंडल और उसके मुखिया प्रधानमंत्री की इस ओर जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या संवैधानिक उत्तरदायित्व राजा तक ही सीमित था? जवाब है- नहीं। भारत में लोकतंत्र है और यहां मामला है सामूहिक उत्तरदायित्व का।



संविधान पर नजर डालें तो अनुच्छेद 75 (3) बताता है कि मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति सामूहिक तौर पर उत्तरदायी होगी। सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत खालिस लोकतंत्र की उपज है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉमन कॉज, ए रजिस्टर्ड सोसायटी मामले (1999) के पैरा 30 में कहा कि सामूहिक उत्तरदायित्व को इन दो तरीकों से समझा जाए। पहला, किसी सरकार के सभी सदस्य उसकी नीतियों पर एकमत होते हैं और वे इसका खुले तौर पर जनता के सामने प्रदर्शन भी करते हैं। चाहे नीति निर्धारण के वक्त कैबिनेट बैठक में मतभिन्नता क्यों न रही हो। दूसरा, इस बैठक में नीतियों के पक्ष या विपक्ष में बोलने का अवसर पाने वाले मंत्री व्यक्तिगत और नैतिक तौर पर उस नीति विशेष की सफलता या असफलता के लिए उत्तरदायी हो जाते हैं।



यह सही है कि प्रधानमंत्री ने राजा से इस्तीफा लिखवाकर छुटकारा पा लिया, लेकिन वे जे. हार्वे और एल. बैथर (ब्रिटिश कॉन्स्टीट्यूशन एंड पॉलिसीज) के कथन को भूल गए, जो बताता है- जब किसी विशिष्ट मंत्री की नीति सवालों के घेरे में आती है तो इसका मतलब है कि पूरी सरकार ही सवालों के बवंडर में घिर गई है।



लोकतंत्र किसी की बपौती नहीं, इसीलिए सामूहिक उत्तरदायित्व अहम है। इस सिद्धांत के व्यावहारिक फायदे हैं। पहला, यह विभागीय पृथक्करण को रोकता है। नतीजतन हरेक मंत्री दूसरे विभागों की नीतियों से भी जुड़ा होता है। दूसरा, कोई विभाग स्वयंभू होकर नीति निर्धारण नहीं कर सकता। तीसरा, इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि कैबिनेट का निर्णय सिद्धांतों पर आधारित है न कि किसी मंत्री के व्यक्तित्व पर।



सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताते हुए कहा था- कि लगता है ए. राजा प्रधानमंत्री की बातों को भी नजरअंदाज कर रहे थे। क्या कैबिनेट पद्धति में एक मंत्री का व्यक्तित्व मंत्रिमंडल पर हावी हो सकता है? यह गंभीर चिंता का विषय है।



राम जवाया कपूर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कैबिनेट सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत पर ही चलती है। आरके जैन मामले में तो यहां तक कहा गया- मंत्रीगण सरकार की नीतियों के प्रति व्यक्तिगत और सामूहिक तौर पर बराबर के जिम्मेदार हैं,अगर कानूनी पहलू ये हैं तो कैबिनेट और उसके मुखिया अब भी पदों पर क्यों काबिज है?



नीलाम्बर झा, विधि विशेषज्ञ



ई-मेल- neelamber.jha@gmail.com

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